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वायनाड भूस्खलन पर सियासत तेज, अमित मालवीय ने राहुल और प्रियंका गांधी के ‘इकोसिस्टम’ पर उठाए सवाल

केरल के वायनाड में प्रकृति की मार के बाद अब राजनैतिक पारा भी पूरी तरह चढ़ गया है। वायनाड में हाल ही में हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) को लेकर अब भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड की मौजूदा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर सीधा और तीखा निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि इस भीषण आपदा के कई दिन बीत जाने के बाद भी दोनों बड़े नेता अब तक प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने क्यों नहीं पहुंचे?

“संकट में जनता के बीच न होना संवेदनशीलता पर सवाल” — अमित मालवीय
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक के बाद एक पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस को घेरा:

जिम्मेदारी से भागने का आरोप: मालवीय ने कहा कि वायनाड में भूस्खलन के कारण कई मासूमों की जान चली गई और बड़े पैमाने पर तबाही मची है, लेकिन न तो पूर्व सांसद राहुल गांधी और न ही वर्तमान सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पीड़ितों का दर्द बांटने वहां पहुंचे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी इस बात से तय होती है कि वह संकट की घड़ी में अपनी जनता के बीच खड़ा रहे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस का वो ‘इकोसिस्टम’, जो छोटी-छोटी बातों पर मुखर रहता है, अपने ही क्षेत्र की इतनी बड़ी त्रासदी पर पूरी तरह मौन है।

जानिए क्या था पूरा मामला और कब हुआ हादसा?
दरअसल, 7 जुलाई 2026 को केरल के वायनाड जिले के मेप्पाडी के पास कल्लाडी क्षेत्र में प्रकृति का कहर टूटा था। यहां निर्माणाधीन ‘अनाक्कम्पोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना’ के पास भारी और मूसलाधार बारिश के चलते अचानक भीषण भूस्खलन हो गया था। इस हादसे में जान-माल का भारी नुकसान हुआ, जिसके बाद सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें कई दिनों तक युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य (रेस्क्यू ऑपरेशन) में जुटी रहीं।

जख्म अभी पुराने भी नहीं भरे थे…
गौर करने वाली बात यह है कि वायनाड के लिए भूस्खलन का यह दर्द नया नहीं है। इससे पहले 30 जुलाई 2024 को वायनाड ने देश के इतिहास की सबसे भीषण भूस्खलन त्रासदियों में से एक को झेला था, जब पुंचीरीमट्टम, चोरालमाला और मुंडाक्कई जैसे हंसते-खेलते गांव मलबे के नीचे पूरी तरह दफन हो गए थे। उस जख्म के हरे रहते ही अब इस नए हादसे ने स्थानीय लोगों को डरा दिया है।

फिलहाल, भाजपा की इस भारी घेराबंदी और तीखे आरोपों पर कांग्रेस आलाकमान या उनके स्थानीय प्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक पलटवार या सफाई सामने नहीं आई है। राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर के बीच, ग्राउंड जीरो पर पीड़ितों के लिए राहत और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) का काम लगातार जारी है।

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